Kya Ishwar hai

क्या ईश्वर है?

क्या ईश्वर है?

JUNE 26

क्या ईश्वर है,अगर है तो कहां है, यह हम सबके भीतर का एक सवाल है?
इस सवाल से ईश्वर चर्चा का विषय बन गया हैं हर कोई इस विषय पर बहुत खूब चर्चा कर सकता है
हम शास्त्रों को पढ़ते हैं सुनते हैं पर क्या हमें उनकी एक भी लाइन एक ही अर्थ याद है?

हर धर्म में कुछ लोग ऐसे होते हैं जो अपने-अपने वेद ग्रंथों की कुछ पंक्तियां पढ़ते हैं, सुनते हैं और उन्हें याद भी रखते हैं। यह बहुत अच्छी बात है।

परंतु यह धर्म की बात है और यहां हम ईश्वर की बात कर रहे हैं

इसके लिए बुद्ध की एक बहुत खूबसूरत कहानी जो मेरे मन के बहुत करीब है आपके साथ साझा कर रही हूं ।

एक बार बुद्ध के पास एक व्यक्ति आया वह बहुत ही नास्तिक था भगवान में उसका कोई विश्वास नहीं था
उस व्यक्ति ने बुद्ध से पूछा,- “क्या भगवान है?” महात्मा बुद्ध ने उत्तर दियाहां भगवान है।

उसके बाद महात्मा बुद्ध के बाद एक दूसरा व्यक्ति आया

वह व्यक्ति आस्तिक था,उसने बुद्ध से पूछा,-“क्या भगवान है?”
महात्मा बुद्ध ने उत्तर दिया, नहीं भगवान नहीं है।

उन दोनों के जाने के बाद महात्मा बुद्ध के पास एक तीसरा व्यक्ति आया।

उस तीसरे व्यक्ति ने भी वही प्रश्न महात्मा बुद्ध से पूछा, “कि क्या भगवान है?”महात्मा बुद्ध ने उसकी बात का कोई उत्तर नहीं दिया वो खामोश रहे, उन्होंने अपनी आंखें बंद कर ली और मौन हो गए।

इसके बाद वो तीसरा आदमी भी चला गया।

बुद्ध का एक शिष्य आनंद जो उनका चचेरा भाई भी था यह सब देख रहा था, वह बहुत आश्चर्यचकित था।
उसे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था। तभी शाम के समय जब  बुद्ध अपने कमरे में विश्राम कर रहे थे आनंद ने पूछा, मुझे एक बात का जवाब चाहिए, बुद्ध ने आनंद से कहा,- “पूछो क्या पूछना चाहते हो?”
आनंद ने कहा आपके पास तीन व्यक्ति आये, तीनों ने आपसे एक ही सवाल किया कि क्या भगवान हैं, परंतु आपने तीनों को एक ही प्रश्न का अलग-अलग उत्तर दिया।
क्या मैं यह जान सकता हूं कि आपने ऐसा क्यों किया? कृपया मेरी जिज्ञासा को शांत करें।

बुद्ध आनंद की बात सुनकर मुस्कुरा दिए ,उन्होंने कहा आनंद यह सभी उत्तर तुम्हारे लिए नहीं थे।
परंतु आनंद बुद्ध की इस बात से सहमत नहीं हुए, उन्होंने कहा कि कृपया मुझे इस बात का उत्तर दें।

जब आनंद नहीं माना तो बुद्ध ने उन्हें बताया कि जो पहला व्यक्ति उनके पास आया था वह एक नास्तिक व्यक्ति था उसकी धारणा थी कि भगवान नहीं है, इसलिए मैंने उससे कहा कि भगवान है।
क्योंकि अगर मैं उससे कहता कि भगवान नहीं है तो उसका अहंकार जो यह सोच रहा था कि भगवान नहीं है और भी बढ़ जाता इसलिए मैंने उसके अहंकार की धारणा को तोड़ दिया।

फिर बुद्ध ने कहा कि जो दूसरा व्यक्ति उनके पास आया वह एक आस्तिक व्यक्ति था भगवान में उसका अटल विश्वास था, उसकी धारणा थी कि भगवान है। इसलिए मैंने उससे कहा कि भगवान नहीं है,क्योंकि भगवान को मानने की उसकी धारणा जड़ होती जा रही थी। और जहां जड़ता आ जाती है वहां खोज खत्म हो जाती है। मैं चाहता था कि वह और खोजे, परम सत्य तक पहुंचे।

महात्मा बुद्ध ने कहा जो तीसरा व्यक्ति आया था उसकी कोई धारणा नहीं थी, वह सच में जानना चाहता था कि ईश्वर है या नहीं, वह अपने मन में एक खोज ले कर आया था,इसलिए मैं मौन रहा, मेरी खामोशी से वह जान गया कि सब उसके भीतर ही है, उसे खुद ही खोजना होगा। इसलिए वह चुपचाप वहां से चला गया।

 

 

No Comments

Give a Reply