गंगा जीवित है और अमर है

Ganga jeevit hai or amar hai

गंगा जीवित है और अमर है

गंगा जीवित है और अमर है

APRIL 26, 2017

क्या आप मानते हैं कि गंगा आज भी जीवित है।गंगा में सभी ऐसे तत्व मौजूद हैं,जो जीवन जीने के लिए जरूरी माने गए हैं।गंगा का आध्यात्मिक,सामाजिक,आर्थिक महत्व हम सब से छुपा नहीं है। गंगा के साथ हमारी भावनाएं जुड़ी हैं।
गंगा का नाम लेते ही मन में श्रद्धा की एक भावना जन्म लेती है जैसे कोई बच्चा अपनी मां को याद करता है उसे नमन करता है वही भाव गंगा के लिए हर भारतीय के मन में उत्पन्न होता है।
गंगा केवल नदी ही नहीं वह जीवनदायिनी और मुक्ति दायिनी है इसको किसी प्रमाण की आवश्यकता नहीं है गंगा के जीवनदायिनी और मुक्ति दायिनी होने के बहुत सारे प्रमाण हमें बहुत आसानी से मिल जाते हैं अगर हम अपने वेदों की बात करें तो बहुत सारी ऐसी कहानियां वेदों में मिल जाएंगी जो गंगा को मोक्षदायिनी का दर्जा देती है इनमें से सबसे प्रचलित कहानी है।

मोक्षदायिनी गंगा

एक राजा थे जिनका नाम था राजा सगर उनके 60000 पुत्र थे। उन्होंने एक बार खेल खेल में कपिल मुनि की तपस्या में विघ्न डाल दिया। कपिल मुनि उस समय गहन तपस्या में विलीन थे, गुस्से में आकर कपिल मुनि ने उन सभी पुत्रों को श्राप दे दिया कि तुम सब जलकर भस्म हो जाओ। इस श्राप से बचाने के लिए राजा सगर के वंशज भागीरथी ने ब्रह्मा की तपस्या की और उनसे अपने पूर्वजों की मुक्ति के लिए गंगा को धरती पर भेजने का वरदान मांगा।ब्रह्मा जी ने प्रसन्न होकर उनको यह वरदान दे दिया कि गंगा पृथ्वी पर जरूर आएगी परंतु गंगा का वेग बहुत ही भयानक था,विशाल गंगा पृथ्वी पर सीधे रूप में नहीं आ सकती थी इसलिए भगीरथ शिव के पास गए उन्होंने शिव की तपस्या की और उनसे प्रार्थना की कि गंगा को वह धरती पर लाने में और गंगा के वेग को संभालने में मदद करें तब शिव ने अपनी जटाओं में गंगा को समेट लिया जब शिव ने गंगा को अपनी जटाओं में धारण किया, उसके बाद गंगा धरती पर अवतरित हुई और राजा सगर के साठ हजार पुत्रों को मुक्ति मिली।
इस कहानी से हमें पता चलता है गंगा मुक्ति का प्रतीक है इसीलिए हम भारतीय गंगा स्नान को पवित्र मानते हैं हम यह मानते हैं गंगा स्नान से हम सारे पापों से मुक्त हो जाएंगे।
यह तो हमने जान लिया की गंगा किस प्रकार मोक्ष दायिनी है किस प्रकार हमारे सारे दुखों को हर लेती है और किस प्रकार वह हमारे सारे पापों को काट देती है।

आइए जानते हैं कि किस प्रकार गंगा जीवनदायिनी है।

गंगा भागीरथी से हिमालय के गोमुख से 18 किलोमीटर ऊपर गंगोत्री से निकलती है यहां गोमुख की आकृति के समान एक छोटी सी गुफा की आकृति रुपी मुंह से गंगा निकलती है गंगा नदी ऋषिकेश होते हुए मैदानों का स्पर्श पहली बार हरिद्वार में करती है। 800 किलो मीटर की यात्रा मैदानी भागों में करते हुए गढ़मुक्तेश्वर,कन्नौज,बिठुर और कानपुर होते हुए गंगा इलाहाबाद प्रयाग पहुंचती है यहां पहुंच कर गंगा यमुना से मिलती है इसे तीर्थराज प्रयाग कहते हैं।
पहाड़ों से निकल कर गंगा अपने साथ बहुत सारे जड़ी बूटियों के तत्व अपने साथ बहाकर ले आती है हिमालय में पाई जाने वाली यह जड़ी बूटियां हमारे भारतीय आयुर्वेद का एकमात्र सहारा हैं।
गंगा में जो ऑक्सीजन की मात्रा पाई जाती है वह किसी भी नदी में पाये जाने वाले पानी से 25% अधिक होती है इसीलिए यह पानी अमृत के समान हो जाता है।यह पानी जड़ी बूटियों के तत्वों के साथ और भी औषधीय हो जाता है अगर हम science की बात करें तो आजकल इस पर काफी रिसर्च चल रही है कि गंगा के पानी में ऐसा कौन सा ब्रह्म तत्व मौजूद है जिससे यह पानी इतना पूजनीय है। NEERI( National Environmental Engineering Research Institute) और CSIR (Council for scientific and Industrial Research) यह दोनों इंस्टीट्यूट इस बात को जानने की कोशिश में लगे हैं।

गंगा के पानी में इतनी शक्ति है कि अगर एक गिलास गंगा का पानी पी लिया जाए,तो आप सारा दिन बिना कुछ खाए रह सकते हैं। आपको किसी तरह की कोई कमजोरी महसूस नहीं होगी और जो तृप्ति मिलेगी उसका कोई मुकाबला नहीं।

गंगा का पानी इतना पवित्र है कि उसे सालों साल भी बंद करके अगर रखा जाए तो वह कभी भी खराब नहीं होता।

गंगा के पानी में ऐसे विषाणु पाए गए हैं जो बीमारी पैदा करने वाले virus को मार देते हैं।

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