Krishna janmashtmi कृष्ण जन्माष्टमी और गीता उपदेश

Krishna janmashtmi कृष्ण जन्माष्टमी और गीता उपदेश

Krishna janmashtmi कृष्ण जन्माष्टमी और गीता उपदेश

भगवान कृष्ण का जन्म द्वापर युग में भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष रोहिणी नक्षत्र में वृष राशि के चंद्रमा में हुआ था। ज्योतिषीय दृष्टि से वृष राशि चंद्रमा की उच्च राशि मानी जाती है भगवान कृष्ण 5 हजार 243 वर्ष पूर्व इस धरती पर अवतरित हुए थे। इस साल 14 अगस्त मध्य रात्रि 12:00 बजे अष्टमी तिथि पड रही है परंतु रात 12:00 बजे भरणी नक्षत्र है और कृष्ण जी का जन्म रोहिणी नक्षत्र में हुआ था, 15 अगस्त शाम 5:40 तक रोहिणी नक्षत्र रहेगा इसलिए 14 अगस्त को उपवास रखना शुभ है और 15 अगस्त को जन्माष्टमी जन्मोत्सव मनाया जा सकता है।

कृष्ण भगवान को प्रिय वस्तुएं

कृष्ण भगवान को प्रिय वस्तुएं जिन्हें जन्माष्टमी को रात 12:00 बजे अगर अर्पित किया जाए तो भगवान कृष्ण बहुत प्रसन्न होते हैं।

माखन मिश्री
पीले वस्त्र
गाय का दूध
तुलसी
मोर पंख
बांसुरी

गीता हमारे वेदों का सार मानी गई है गीता का ज्ञान जीवन का सही मूल्य सिखाता है गीता एक ऐसा ग्रंथ है जिसके उपदेश किसी धर्म विशेष के लिए नहीं बल्कि पूरे संसार के लोगों के लिए हैं इसीलिए श्रीकृष्णजी जिन्होंने गीता का ज्ञान दिया वह भारत में ही नहीं पूरे विश्व में प्रसिद्ध हैं इसीलिए भारत से ज्यादा उन को मानने वाले लोग विदेशों में हैं।
आज जन्माष्टमी के अवसर पर मैं यहां पर गीता के उन 5 उपदेशों को दे रही हूं जो हमें सामान्य जीवन में अपनाने चाहिए ताकि जिसके लिए भगवान कृष्ण जी  इस धरती पर आए, आज जन्माष्टमी के दिन हम उनके लिए उनके बताए उपदेशों को मानकर सच्चे भक्त हो जाए।

गीता के पांच उपदेश

  1. अगर तुम उसके लिए लड़ नहीं सकते जो तुम चाहते हो तो उसके लिए रोयो भी मत जो तुम्हें मिला नहीं।

  2. मेरा तेरा छोटा-बड़ा अपना-पराया मन से मिटा दो फिर सब तुम्हारा है तुम सबके हो।

  3. क्यों व्यर्थ चिंता करते हो, किससे डरते हो, कौन तुम्हें मार सक्ता है क्योंकि ना आत्मा कभी जन्म लेती है और ना ही कभी मर सकती है।

  4. नर्क सिर्फ तीन रूपों में है- लालसा, गुस्सा और वासना।

  5. अपने दिल की आवाज सुनो,दूसरों की सलाह से कभी विचलित मत होना क्योंकि तुम्हारे दिल की आवाज ही मेरी आवाज है।

यह पांच उपदेश सिर्फ उपदेश नहीं जीवन का सबक है,
जिन्हें सुनकर, समझ कर और मानकर जीवन के असली उद्देश्य को प्राप्त किया जा सकता है। गीता सिर्फ सुनने का ग्रंथ ही नहीं है उसके हर एक शब्द में जीवन का असली सार छुपा हुआ है।इन शिक्षाओं को 5000 साल पहले दिया गया था लेकिन ये हमारे जीवन में आज भी उतनी ही
महत्वपूर्ण और प्रेरणादाई हैं।

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