Raksha bandhan ka muhurat(रक्षाबंधन का मुहूर्त और ग्रहण का समय)

raksha bandhan ka muhurat

Raksha bandhan ka muhurat(रक्षाबंधन का मुहूर्त और ग्रहण का समय)

रक्षाबंधन का मुहूर्त और ग्रहण का समय

इस बार सावन माह की पूर्णिमा (7 अगस्त) को रात 10.52 बजे श्रवण नक्षत्र (मकर राशि) पर खंड चंद्रग्रहण लग रहा है। यह मध्य रात्रि 12.48 बजे तक रहेगा। चंद्रग्रहण संपूर्ण भारत में नजर आएगा। ग्रहण के समय चंद्रमा पर गुरु,सूर्य, मंगल, और शनि ग्रहों की पूर्ण दृष्टि रहेगी। धर्मशास्त्रों के अनुसार चंद्रग्रहण से 9 घंटे पहले तक सूतक होता है।रक्षा बंधन के दिन 7 अगस्त को दोपहर 1.52 बजे से चंद्रग्रहण का सूतक काल आरंभ हो जाएगा।भद्रा दिन में 11.30 बजे तक है। इसलिए सुबह 11.30 से दोपहर 1.50 बजे तक ही रक्षाबंधन का मुहूर्त निकलेगा। भद्रा में रक्षाबन्धन वर्जित माना गया है।
इस कारण बहनों के लिए सूतक से पहले ही भाइयों को राखी बांधना ठीक होगा।
ऐसा संयोग 12 साल बाद बना है जब राखी के दिन ग्रहण लगा है। पूर्णिमा तिथि का प्रारम्भ 6 अगस्त 2017 को रात्रि10:28 बजे से आरंभ होगा परन्तु भद्रा काल व्याप्त रहेगी।

आइए जानते हैं क्या कारण है भद्रा में रक्षाबंधन न मनाने का

ऐसा माना जाता है कि रावण की बहन सूर्पनखा ने अपने भाई रावण को भद्रा काल में ही राखी बांधी थी, जिस कारण से रावण का सर्वनाश हुआ था। इसलिए भद्रा के समय राखी नही बांधते हैं।

रक्षा बन्धन का मंत्र

येन बद्धो बली राजा, दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वां प्रतिबध्नामि, रक्षे! मा चल! मा चल!!

 इस मंत्र का अर्थ है कि जिस प्रकार राजा बलि ने रक्षासूत्र से बंधकर बिना विचलित हुए अपना सब कुछ दान कर दिया था। उसी प्रकार हर बहन कहती है, हे रक्षा! आज मैं तुम्हें अपने भाई की कलाई पर बांधती हूं, ताकि मेरा भाई अपने उद्देश्य से विचलित हुए बिना मेरी रक्षा के लिए दृढ़ बना रहे।
बहनें भाइयों को कुमकुम तिलक के साथ राखी बांधें, आरती उतारते हुए उनकी लंबी उम्र की कामना करें, यह एक आम बात है हर एक बहन अपने भाई की लंबी उम्र के लिए कामना करती है।
परंतु हमारा एक और भी फर्ज बनता है कि हम रक्षाबंधन के दिन अपने देश की रक्षा के लिए अपने सैनिक भाइयों की लंबी उम्र के लिए दुआ करें। ताकि वह हमारी रक्षा कर सकें।

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